–ज्योति झा

जनकपुरधाम, २७ पुस ।

निडर निस्वार्थ बेटी उमा छल जकर नाम
हीत हेतु दोसरके नहि करथि वो आराम !

सिरहाक बेटी सभलेल कलम चलबति छलिह
नहि जानि विना कहने कतऽ चलि गेलिह !!

हाथ उठबिते ओकर हाथ काटिदेल गेलै
झोटा पकडि ओकर माथ फारिदेल गेलै !

कोन पापीक हृदय कठोर भेलै एहन
उमापर दबियासँ ३६ बेर प्रहार भेलै !!

नहि काटू कहितो कटाइत रहिगेल उमा
जिबीते माछ ताबासन पटपटाइत रहिगेल उमा !

पानिक एक एक बुन्दलऽ तरसैत, प्यासल
पाखि काटल चिरैसन फरफराइत रहिगेल उमा !!

रातिमे सुतल रहै चिचियाहट नहि सुनलक
आ कि जानि बुझिक लोक आखि मुनलक !

केहन बहिर लोक नहि सुनलक चित्कार
वो उमाके रातिभर रूइया जँका धुनलक !!

कतेको साल, कतेको सरकार बदलि गेलै
खुनक छिटकाबाला वो देबाल बदलि गेलै
!
कल्पति हेतिह अखनो आत्मा दीदी उमाक
वो अपराधिक हाल,बेहाल किया नहि भेलै !!