बरसाइत (बटसावित्री) पाबनिके मंगलमय शुभकामना

–सिमा चौधरी
जनकपुरधाम, १६ जेठ । “चलु चलु हे सखि– बहिनिया पुरान नवकनिया, आजु छियै बर्साइत हे, रहब अहिबात हे, पूजब बरसाइत हे”
जि अहि प्रकारक लोक गीतसँ अखन, पुरा मिथिलाञ्चलक पुरानसहित नव कनिया लोकनी बट–सावित्री (बरसाइत) क ओरियानसहित पूजापाठमे व्यस्त छथि ।
जेठ मासक कृष्ण पक्षक आमवश्या तिथीके दिन मनाओल जाएबला बरसाइत पाबनिक लेल मिथिलाक मिथिलानीसभ करिव एक÷दु मास पहिनेसँ विभिन्न ओरियानमें व्यस्त रहैत छथि । अहिबाती मिथिलानीसभक प्रमुख पाबनिक रुपमे रहल अहि पाबनिमे नव सारी, नव लहठी , सोल्ह श्रृंगारक विभिन्न तरहक सामग्री सहित बाससँ बनाओलगेल बैन, आदी इत्यादी ओरियान करैत छथि ।
तहिना नवेद्यक लेल मौसमी फल आम, लिची, चना, अंकुरीके प्राथमिकता देलगेल अछि । बरक गाछ तर कएल जाएबला अहि पुजामे ब्रतालु मिथिलानीसभ बर गाछके बर प्रतिक रूपमे मानि पियर, लाल तागसँ वर बन्हैत छकि त जल आ आम लऽ तिन, पाँच÷सात बेर जल ढारैत छथि । तहिना सत्यवान– सावित्रीक आ नाग–नागिनक कथा सुनैत छथि ।
कहल जाइत छकि जे आजुक दिन अर्थात जेठ मासक कृष्ण पक्षक अमावश्याक दिन सावित्री अपन मृत पति सत्यवानके अपन तपस्या आ साधनासँ पुनः जिवित कऽ अटल सौभाग्यके वरदान पौने रहथि ।
मिथिलामे किछ वर्ष पहिनेधरि विशेषक ब्राह्मण, कायस्थ आ सोनार जातिक अहिबाती महिला लोकनीसभके लेल मात्र अनिवार्य रहल बरसाइत पाबनि आब विभिन्न समुदायक अहिबाती महिलासभ सेहो श्रद्धापूर्वक करैत छथि । एक व्रति महिलाक अनुसार अखण्ड सोहागक लेल कएल जाएबला कोनो पाबनि एक समुदायक नहि होइत छकि, तैं हमहुसभ पतिक दीर्घायुक कामनासँग ई पूजा करैत छि ।
एम्हर ब्राह्मण, कायस्थ आ सोनार जातिक नव–विवाहितासभके पहिल साल बरसाइत पाबनि धुमधामसँग पुजाओल जाएत अछि । नव विवाहिता महिला लोकनीके अहिमे सासुरसँ भार एबाक परम्परा अछि । भारमे बाससँ बनाओलगेल बैन, पाचँ, सात या एघारटा अबैत अछि त माइटसँ बनाओल गेल विषहराक पाँचु बहिनक रुपमे अबैत छन्हि । तहिना कपडासँ बनाओल गेल बर कनिया फुलडाली (महफा) मे राखि अबैत अछि ।
नब बैरीकमे उरिदक घाईटसँ बनाओलगेल परिकारके बान्हल जाइत अछि, जे कि पबनैतिके अपन माथ पर धऽ घरसँ बर गाछ तर लजेबाक परम्परा अछि । गौरी पूजाक विशेष महत्त्व रहल अहि पाबनिमे सासुरसँ गौरी वास्ते हरैदक ठेसर अबैत अछि । आ ओहिके गौरीक रुप बना पुजाओल जाइत अछि ।
तहिना प्रसादक लेल आम, लिची, चना, अंकुरी (खैरी) सहित नब सारी, नब लहठी, श्रृंगारक सामग्री भारक रूपमे रहैत अछि । मिथिलाक विभिन्न तरहक मधुर, खाजा, लड्डु, मुंगवा, खजुरिया, पिरुकिया सेहो भारमे रहैत अछि । विवाहित महिलासभक इ पाबनि मिथिलाक लोक संस्कृतिक आ परम्पराके अभिन्न अंग बनल अछि । बरसाइत पाबनि प्रकृतिसँ सेहो जुडल अछि । बर गाछक शितलता आ बाससँ बनाओल गेल बैनके प्रयोग प्रचण्ड गर्मीसँ बचेबाक हेतु होइत अछि ।
अन्तमे सम्पुर्ण अहिबाति मिथिलानीसभके बरसाइत (बटसावित्री) पाबनिके मंगलमय शुभकामना अछि । अटल सौभाग्य आ सन्तानसँ सभगोटे भरल पुरल रहु ।

