–सिमा चौधरी
जनकपुरधाम, ५ माघ । “हे, फेर सऽ स्कुलसभ कहाँदुन बन्द हेतै ! कतेक दिन लय बन्द होयत से नहि जानि । यी कोरोना धिया–पुतासभके भविष्य बर्बाद कऽ रहल छैक” ––– यी सम्वाद एखन जतऽ ततऽ अभिभावकसभमे चैलरहल अछि ।

तेसर लहरक रुपमे रहल ओमिक्रोन आ कोरोना भाईरस हमरा आहाँक जीवनमे प्रवेश कऽ चुकल अछि । जाहिके मध्यनजर करैत नेपाल सरकारसहित प्रदेश सरकार सेहो शैक्षिक संस्थासभ बन्द करवाक नियार केने अछि ।

समाजक भविष्यके कर्णधार रहल धियापुतासभके जीवनसँ कियो खेलबाड करऽ नई चाहैत छथि, आ ने करवाक चाही । कियाक तऽ ओसभ भविष्यके कर्णधार छथि । मुदा हुनकरसभक उज्वल भविष्य कखन सुनिश्चित हेतैन, जखन हुनकासभके गुणस्तरीय शिक्षा प्राप्त हेतैन । जखन की बेर–बेर शैक्षिक संस्थासभ बन्द भऽ रहलाक कारण धिया–पुतासभ गुणस्तरीय शिक्षा अनुशासन सहित अप्पन नियमित अभ्यास सऽ बञ्चित भऽ रहल अछि ।

ओना सरकार शैक्षिक क्रियाकलापके भर्चुअल वा बैकल्पिक शिक्षण सिकाईके बिधिसभ अपना कऽ संचालन कऽ रहल अछि । मुदा यी कतेक व्यवहारिक आ गुणस्तरीय अछि ?

धियापुतासभ विद्यालय नहि गेलाक कारण हुनकासभ लग खाली समय पर्याप्त रहैत छन्हि, जाहिमे ओसभ अनावश्यक कार्य करवाक दिश उन्मुख भऽ जायत छथि आ मायबाबुके हाकन–डाकनके शिकार होईत छथि । समूहमे समकक्षीसभक बीच समय व्यतीत कयला सँऽ धियापुतासभमे चेतनाके बिकास होईत अछि ।

जतय हुनकासभके संघर्ष करबाक, प्रश्नके उत्तर देबाक, बिभिन्न समय आ घटनाके बिषयमे धारणा बनेबाक आ अनुशासनके पालन करबाक बिषयमे व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त होईत छन्हि । पहिलेके समयमे संयुक्त परिवारके अवधारणा बेसी व्याप्त छल हमर आँहाके समाजमे । जतऽ घरमे बहुत सदस्यसभ सँगे रहैत छल । विभिन्न उमेरके धिरे धिरे बिकास कऽ रहल बहुत धियापुतासभ सेहो सँगे सँगे एकहि परिवारमे रहैछ छल ।

जतऽ छोट धियापुतासभके सिखयके बहुत अवसर छलै ,अपना सऽ पैघ बच्चा सऽ सिखवाकलेल । मुदा एखनुक परिवेशमे हम आँहा बेसी एकल परिवार आ कम सन्तानके अवधारणाके बेसी उचित मानि बालबच्चाके परबरिशके बेसी महत्व दैत छी । जाहि कारण घरमे जीवन उपयोगी कौशल सिखवाक एकटा बच्चाके लेल कम अवसर अछि । माईट– पाईनमे खेलकुदके जगह मोबालई आ टीभी बेसी जगह ओगईट लेने अछि ।

दिनभैर घरमे हाकन–डाकनसँ धियापुतासभमे पडिरहल मानसिक असरक कारण कतेको धयापुतासभ नकारात्मक दिशा दिश अग्रसर भऽ जाईत छथि । हमरा आँहाके मिथिलामे एकटा कहबी छैक जे –“धिया–पुतासभ बाँसक काँच करची जकाँ होईत अछि, जेनाकऽ मोडियौ, तेना मोडा जायत”

अभिभावकके भुमिका

कोमल मानसिकता बिच रहल धियापुतासभके अभिभावकके सम्बेदनशील रुपसँ प्रस्तुत होवय पडत, जाहिसँ हुनकासभमे नकारात्मक क्रियाकलाप दिस ध्यान नहि जाईन् । हुनकासधसँग बेशी सऽ बेसी समय दऽ बिविध नवकार्यसभमे अग्रसर होवाक उत्प्रेरणा जगावय हेतु ब्यस्त रखनाई, नीक शब्दसभके प्रयोग केनाई, खेलेनाई, हसेनाई आ पारिवारिक वातावरणमे घुलमिल सहिल शैक्षिक क्रियाकलापसभ दिश सेहो उन्मुख करय पडत ।

जाहिके फलस्वरुप ओसभ अप्पन खाली समयके बिविध मनोरञ्जनात्मक तरिकासँ उपयोग कसकथि । बेर बेर आबिरहल यी भाईरसके कारण कहल जाय तऽ ओसभ अप्पन अमूल्य बाल्यकालक समय सँऽ बञ्चित भऽ रहल छथि । हुनकासभके नियमित विद्यालय नई जायब, संगी–सखी सब सँग खेलनाई, बजनाई, हँसनाई आ घुमनाई सहित अनेकानेक क्रियाकलाप सँ दूर भऽ रहय बाध्य छथि ।

पहिलबेर नेपाल सरकार कोभिड–१९ के महामारी उच्च जोखिमके ध्यानमे रखैत ११ चैत २०७६ सँ देशव्यापी बन्दाबन्दी घोषणा केलक ।मुदा संक्रमण बढैत गेलाक बाद बन्दाबन्दी समय थप होबय लागल । जाहि फलस्वरुप एसईई आ २०७७ बैशाखसँ शुरु होमयबला नब शैक्षिक सत्र सेहो प्रभावित भेल ।

तहिना कोरोनाके दोसर लहरके रुपमे रहल डेल्टाप्लस भेरिएन्टके कारण २०७८ बैशाखक पहिल हप्तामे सेहो शैक्षिक संस्थासभ बन्द कयलगेल । करिब पाँच महिनाक बाद खुजल शैक्षिक संस्थासभ पुनः ओमिक्रोन नामक भाईरसके कारण लम्बा बन्द होबाक कगारमे अछि । पहिल बेर सन् २०१९ डिसेम्बरमे चीनके बुहानमे देखल गेल यी भाईरस अखन विश्वके सभदेशमे ताण्डब मचारहल अछि ।

अतः हम आँहा सम्पूर्ण अभिभावकके एहि बिषयमे गंभीर भऽ एहन समयमे अवसरसभके पहिचान कय धियापुताके उचित परबरिस दिश ध्यान देनाई एकटा चुनौती अछि । समय गंभीर छैक, मुदा संकटके यी समय बहुत जल्द एक दिन बिति जेबे करतै आ सामान्य भऽ जायत ताहिमे सभगोटे आशाबादी छि ।