ज्ञान, वाणी, कला एवम् संगीतक देवी ‘माँ सरस्वती’

–सिमा चौधरी
जनकपुरधाम, २३ माघ । मुख्य रूपमे रहल चारिटा ऋतुसभमे बसन्त ऋतुके ऋतुसभक राजा कहल जाईत अछि ।
याह सुन्दर ऋतु अर्थात माघ मासक शुक्ल पक्षक पञ्चमी तिथिक दिन ज्ञान, वाणी, कला एवम् संगीतक देवी माँ सरस्वतीक जन्म भेल छन्हि ।
आजुक दिन विद्यार्थीलोकनी घर, विद्यालय विभिन्न सार्वजनिक स्थल तथा चौक चौरहासभमे माँ भगवतीक प्रतिमा राखिकऽ श्रद्धापुर्वक पुजा करैत छथि ।
श्वेत रङ्ग प्रिय रहल माँके श्वेत पुष्प, स्वेत वस्त्र सहित विभिन्न तरहक फलफूल, मधुर लऽ पुजा काएल जाईत अछि ।
तहिना माँ सरस्वतीके आजुक दिन लाल, पियर, गुलाबी अबिर चढाकऽ मिथिलामे विधिवत रूपमे होरिक शुरुवात करबाक परम्परा अछि ।
माँ सरस्वतीके बागिश्वरी, भगवती, शारदा, बाग्देवी सहित विभिन्न नामसँ आराधना कएल जाईत अछि ।
एम्हर, आजुक दिन छोट धियापुतासभके घरक जेष्ठ व्यक्तिसभद्वारा भटहा धराओल जाएत अछि । कहल जाईत छैक जे बसन्त पञ्चमीक दिन बच्चासभके विद्या आरम्भ करओलासँ हुनकरसभह मानसिक विकास तेज होइत अछि ।
तहिना, बेटी जातीके आजुक दिन नाक कान छेदबाक परम्परा सेहो मिथिलामे देखल गेल अछि । गाम घरसभमे किसानसभ हरके सेहो पुजा करैत छथि ।
आजुक दिन, किसानलोकनी अंगनामे हर ठाढ कऽ धान गहुँम दलहन सहित विभिन्न तरहक अन्नके ढेरि लगाकऽ हरक पुजा करैत छथि ।
जाढक बाद प्रकृतिके सुन्दर आ मनमोहक रूप ऋतुराज बसन्त देखल जाईत अछि । बसन्तक आगमनसँग कोइलीक सुन्दर स्वर वातावरणमे नब ऊर्जा प्रदान करैत अछि ।
पतझर भेल गाछ वृक्षसभमे नव पल्लव पल्लबित होइत अछि । स्वास्थ्यके दृष्टिसँ देखल जाए त यी मौसम (बसन्त ऋतु) बहुत निक अछि ।
मनुस सहित पशुपंछीसभमे सेहो नव चेतनाक सञ्चार होइत अछि । बसन्त ऋतुमे प्रकृति अपन पूर्ण योवन पर अबैत अछि ।
बसन्त ऋतुसँ अपनसभहÞ नव वर्ष शुरू होईत अछि । अइ ऋतुमे होली, रंगपञ्चमी, बसन्त पञ्चमी, नवरात्रि, रामनवमी, हनुमान जयन्ती आ गुरु पूर्णिमा पावनि मनाओल जाईत अछि ।

