स्वास्थ्यसँ जुडल पावनि तिलासंक्रान्ति

–सिमा चौधरी
जनकपुरधाम, १ माघ । मिथिलाञ्चलके प्रमुख पावनिसभमेसँ एक रहल तिलासंक्रान्ति नेपाल सहित भारतमे आई हर्षोल्लासकसँग मनाओल जारहल अछि ।
माघ १ गतेके दिन मनाओल जाएबला यी पावनिमे प्रातः स्नान आ पूजापाठ क तिल, गुड आ चाउर प्रसादक रूपमे चढाओल जाईत अछि । चढाओलगेल तिल, गुड, घरक जेष्ठ व्यक्ति अपनासँ छोटसभके बहबैत (खुवबैत) छथि । कहल जाईत छैक जे आजुक दिन तिल खाएके किछ अलग महत्त्व छैक, जे व्यक्तिके हम आइ तिल खाइत छि हुनक जिवनभरि ऋणी रहब ।
तहिना आजुक दिन सुर्य दक्षिणसँ उत्तर दिश प्रवेश करैत अछि, तँए आजुक दिनके उत्तरायण सेहो कहल जाइत अछि ।
धार्मिक ग्रन्थ अनुसार भीष्म अजुके दिन अपन मृत्युके समय तय केने छलथि त भागिरथ सेहो अजूके दिन गंगाके पृथ्वीमे अवतरण करा सागरमे मिलओने छलथि । तँए आजुक दिन प्रयाग आ गंगासागरमे कएलगेल स्नानके महास्नान कहल जाइत अछि ।
कहलजाय छैक आजुक दिन देवातिदेव महादेवक पुजा कएलासँ सुख, शान्ति आ समृद्धि प्राप्त होइत छैक । मिथिलाञ्चलमे आईसँ शुभ कार्यसभके शुरुवात कएलजाईत अछि । मिथिलामे आई तिल, मुरही आ चुरासँ बनाओलगेल परिकार चाउर, घि, दहि सहित गर्म कपडा दान कएलजाइत छैक ।
मौसमक अनुसार यी समय जाढ भेलाक कारण आजुक दानके सामाजिक सदभावके आधारमे सेहो पुष्टि कएलजाइत अछि । एम्हर घरघरमे उरिदक दालि आ आदिसँ बनाओल गेल खिचडी, घि, तिलक चटनि, दहि, पापर आ खमहरुवा सहित विभिन्न तरहक तरकारीके तरुवा खाएल जाइत अछि ।
तहिना तिलक तिलवा, चुराक चुरलाई, मुरहीक लाई सेहो खेबाक परम्परा अछि । जाढक समय रहलाक कारण अहि पावनिमे बनाओलगेल परिकारसभमे शरीरमे गर्मी उत्पन्न होमयबला सामग्रीसभके प्राथमिकता देल गेल अछि । तँए कहल जाय त यी लोकके स्वास्थ्यसँ जुडल पावनि सेहो अछि ।
मिथिलाक परम्परा अनुसार बेटी पुतौहके तिल,चुरा आ मुरहिसँ बनाओलगेल परिकार भार स्वरूप पठाओल जाईत अछि । गाम घरमे कुमारी कन्यासभद्वारा पुजाओल जाएबला तुसारि पावनि सेहो आइएसँ शुरुवात होइत अछि । एक महीनाधरि चलयबला यी पावनि फागुन १ गते निस्तार कएल जाईत अछि । तहिना नवविवाहितासभके भतराइस पावनि सेहो अजुके दिन कएल जाइत अछि ।
नेपाल बहुजातीय, बहुभाषिक, बहुसांस्कृतिक, बहुधार्मिक विशेषतासभसँ भरल सुन्दर देश अछि । भौगोलिक, जातीय आ सांस्कृतिक विविधता रहल नेपालमे एकै दिन परयबला आ एकै नामक पावनिके अनेक भेग आ समुदायमे विभिन्न तरिकासँ मनएबाक प्रचलन सेहो अछि ।
माघ महिनाक १ गते मनाओल जायबला यी पावनिके थारु समुदाय माघि कहि नव बर्षक रुपमे मनबैत छथि । जे मैथिली आ याह समुदाय बिचक सांस्कृतिक सामिप्यताक उदाहरण अछि ।

